Wednesday, 29 August 2012

SANAM....


1 comment:

  1. पुरे आलम में ये दरद दर्द की दवा ना मिले,
    या ...
    फिर दीवाना कर के ये दुनिया के हवाले कर दे ! या ! बिखेर दे.!
    वाह लाजवाब
    इस दर्द की लज़्ज़त सच्चे आशिक़ ही समझ सकते हें
    इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
    दर्द की दवा पाई दर्द बेदवा पाया (गालिब)

    ReplyDelete