तेरे बगैर मेरा सारा शहर उदास लगता है |
मेरे शहर की रंगीनिया भी उदास लगती है ||
मेरे शहर के मौसम,सिंदूरी शाम तनहा लिए फिरती हूँ |
मेरे बाग़ बगीचे के फूलों को मुर्जाए हुए दिखती हूँ ||
आज कल एक अजीब वीरानी सी उदासी छाई है |
तुजे पाने, तेरे आने के जूठे ख्वाब लिए जीती हूँ ||
तेरी बेपनाह चाहत की आदतें मेरे शहर को खाए जा रही है|
तेरी बेपनाह चाहत की आदतें " नीशी "को जीते जी मार रही है|
अब तो तेरी दुआओं का असर भी मेरे शहर को छूता नही !!
दी.७/८/२०१२ नलिनी सिंह " नीशी "

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