अँधेरे गम के उदासी ओ के लम्हों में,
तेरे गले से मेरा चिपक जाना, अच्छा लगता है |
खुद में चंचल सी शरमा के सिमट जाना,
तेरी एक शरारती छुअन से, अच्छा लगता है |
चुल बुली अदा ओ,निगाहों से, तेरे कंधे पे,
मेरा सर रखने की चंचलता, अच्छी लगती है |
शाम ढले तक भोली भाली,बाते करके,
तुजे सामने बिठाये रखना, अच्छा लगता है |
नलिनी सिंह " नीशी "

No comments:
Post a Comment