मेरी मुस्कराहट की वजह शायद तुम हो |
मेरी आँखों की पलकों का नूर शायद तुम हो||
मेरे अस्तित्व के अंदाज़ का हूर शायद तुम हो|
मेरी यादो की बारात में बसे शायद तुम हो||
मेरे जिस्म रूह की आहट में शायद तुम हो |
मेरी आँखों से टपकी छोटी बूंदों में शायद तुम हो ||
मेरी अनकही ख्वाहिशो का अपनापन शायद तुम हो |
प्यारे से नीले आसमान की सफ़र में शायद तुम हो ||
नलिनी सिंह " नीशी "

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