Friday, 17 August 2012

अपना बना के ले चल




मेरी हर साँस पर तेरी वफ़ा के वजूद का पहेरा लगा के संग ले चल |



अपनी बाहों में समेट कर सितारों वाली रात की ओर ले चल ||



इन फूलों की बारिश में भीग के प्रेम का स्पर्श सहला के ले चल |



|मौसम का मदमस्त खुमार बन के चांदनी बरसात की ओर ले चल ||



सपनो का समंदर बन कर एक तूफानी लहर की ओर ले चल |



फरेबी दुनिया बहोत से दूर बावरे मन को बहला के ले चल ||



मेरी उंगली पकड़ कर मेरे दील की धड़कन के संग ले चल |



क़दमों में फूल बिछाए ज़िन्दगी का सबब मेरी कलाई थाम के ले चल ||



जालीम जमाने की नीगाहो से बहोत दूर, हर शहं मेरे नाम करके ले चल |



तेरी मोहब्बत ए वफ़ा का जूनून हथेली पे देके, मेरी रगों मे नशा बना के ले चल |



प्यार का फ़रिश्ता बन के निश्चल प्रेम की अनमोल दुनीया में ले चल || 

नलिनी सिंह

दी.३१ / ७ / २०१२

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