मेरी हर साँस पर तेरी वफ़ा के वजूद का पहेरा लगा के संग ले चल |
अपनी बाहों में समेट कर सितारों वाली रात की ओर ले चल ||
इन फूलों की बारिश में भीग के प्रेम का स्पर्श सहला के ले चल |
|मौसम का मदमस्त खुमार बन के चांदनी बरसात की ओर ले चल ||
सपनो का समंदर बन कर एक तूफानी लहर की ओर ले चल |
फरेबी दुनिया बहोत से दूर बावरे मन को बहला के ले चल ||
मेरी उंगली पकड़ कर मेरे दील की धड़कन के संग ले चल |
क़दमों में फूल बिछाए ज़िन्दगी का सबब मेरी कलाई थाम के ले चल ||
जालीम जमाने की नीगाहो से बहोत दूर, हर शहं मेरे नाम करके ले चल |
तेरी मोहब्बत ए वफ़ा का जूनून हथेली पे देके, मेरी रगों मे नशा बना के ले चल |
प्यार का फ़रिश्ता बन के निश्चल प्रेम की अनमोल दुनीया में ले चल ||
नलिनी सिंह
दी.३१ / ७ / २०१२
दी.३१ / ७ / २०१२
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