Monday, 20 August 2012

तूफान की ओर





मेरी महोब्बत की कश्ति को हम , 
मजधार में तूफान की ओर ले चल दिए |

किनारों पे बैठ के सिसकियां ना लेते, 
साहील की तमन्ना की ओर चल दिए ||

जानते थे डूबेगी कश्ती , मगर तूफान से, 
उलज्ने हम जान बुज़ कर चल दिए | 





कहा था सबने, डूबेगी यह कश्ती,
पर तुफानो से टकराना मेरी आदत हो लिए ||


आया तूफान का सैलाब डूब गए हम,
हमारी कश्ती समेत,जब पता चलाए |

तूफां सिमट नए किनारे पे आ गए, 
नए अरमानों की गोदी में जा बिठाए ||

                                     नलिनी सिंह " नीशी "

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