सनम के बग़ैर ये ज़िन्दगी अब कहाँ गुज़रे,..
तेरा हुस्न इश्क क़यामत,
हौले से मुस्कुराना क़यामत,
झील सी आँखें क़यामत,
चाल में मस्ती क़यामत.
आँचल को लहराना, क़यामत,
शर्माने की अदा,क़यामत,
घटा सी खुली जुल्फें, क़यामत,
तेरा य़ू पास जाना,क़यामत,
तेरी नजरे य़ू उठाना मेरा फ़साना ..सुबान अल्लाह..
नलिनी सिंह " नीशी "..

Nice !
ReplyDeletegone through some of ur writing on this page..they may be very popular if written 15 years ago.... bring something new....
ReplyDeleteबोहॊत सुन्दर
ReplyDeleteआशिक़ों के रोज़ व शब
चेहरा हॆ जॆसे झील में हंसता हुआ कंवल
या ज़िन्दगी के साज़ पे छॆड़ी हुई ग़ज़ल
जाने बहार तुम किसी शाइर का ख़ुआब हो