Sunday, 12 August 2012

तेरे बगैर उदासी छाई है !



मेरे जले ह्रदय में आह लिए फिरती हूँ | 

मेरी ठहरी साँसों को हाथो में लिए फिरती हूँ ||


हर पल आंसू ओ के मोती लिए फिरती हूँ | 

गुमसुम सी खामोशीया साथ लिए फिरती हूँ || 


तेरी यादों का तिनका तिनका जुड़े फिरती हूँ | 

हर पल रेशम के तार में अरमान लिए फिरती हूँ ||




हर पल तेरा जिक्र मेरे जेहन में लिए फिरती हूँ |

तू पास नही मै अस्तित्व को भुला के चली हूँ ||


तेरी दुआ ओ के मंजर की आश लिए फिरती हूं | 

तुजे पाने, तेरे आने के जूठे ख्वाब लिए जीती हूं || 


तेरी बेपनाह चाहत की आदतें हमे जीते जी मार रही है | 

अब नींद की ज़ंजीरो से आजाद हो के घुमती हूँ || 

                                  नलिनी सिंह ...... " नीशी " 

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