मेरे जले ह्रदय में आह लिए फिरती हूँ |
मेरी ठहरी साँसों को हाथो में लिए फिरती हूँ ||
हर पल आंसू ओ के मोती लिए फिरती हूँ |
गुमसुम सी खामोशीया साथ लिए फिरती हूँ ||
तेरी यादों का तिनका तिनका जुड़े फिरती हूँ |
हर पल रेशम के तार में अरमान लिए फिरती हूँ ||
हर पल तेरा जिक्र मेरे जेहन में लिए फिरती हूँ |
तू पास नही मै अस्तित्व को भुला के चली हूँ ||
तेरी दुआ ओ के मंजर की आश लिए फिरती हूं |
तुजे पाने, तेरे आने के जूठे ख्वाब लिए जीती हूं ||
तेरी बेपनाह चाहत की आदतें हमे जीते जी मार रही है |
अब नींद की ज़ंजीरो से आजाद हो के घुमती हूँ ||
नलिनी सिंह ...... " नीशी "

વાહ ખુબ જ સરસ
ReplyDeletevery touchy
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