नलिनीसिंह "नीशी" की रचनाए आप तक
Sunday, 19 August 2012
हमे बड़ा नाज़ है
तुम्हारी चाहत पे हमे बड़ा नाज़ है ,
पर हम तुम्हे कैसे इज़ाज़त दे ?
हमारे लहराते आंचल को हवाओं की
फीजाए उड़ा के दूर ले जा चुकी है |
हमारी मासूम मोहब्बत का फ़साना,
हम किसी और के हवाले कर चुके है ||
नलिनी सिंह
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