मेरे दिलमे उससे मिलने की आस है |
मेरे आशा दीप में उससे मिलने की चाहत है ||
मुजे मेरी मासूम मोहब्बत के भरोसे पे नाज़ है |
उषा की लाली से फूलो मे जमी हुई तुषार पर ,
तुम्हे जो महसूस जो करती हू |
मुजे मेरे लहराते आँचल की आहट पर,
तेरे वजूद का एहसास जो है ||
नलिनी सिंह " नीशी "
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