नलिनीसिंह "नीशी" की रचनाए आप तक
Wednesday, 15 August 2012
- - हमकदम बन जाते तो - -
हमारे क़दम यूँ ही उठते तेरी आवाज़ से |
मुझे नहीं आता है पलट कर देखना ||
मुझे नहीं आता अधियारे से घबराना |
मुझे नहीं आता है, कोरे स्वप्न सजाना||
मेरा दिल तेरे कदमो में जूक जाता |
" निशी "
मेरी आस्था तेरे कदमो को चूम जाती ||
नलिनी सिंह " निशी "
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