Tuesday, 28 August 2012

सनम ..इस दिल में आ के बस जाईये..


..... सनम ..... 

इस दिल में आ के बस जाईये.. 
इस दिल में दर्द का रोग छोड़ जाईये.. 

इस दिल को इश्क में ऐसे डुबाते जाईये..
या फिर इस दिल के खिलौने से खेलते जाईये..




इस दिल में मुहब्बत की ऐसी आग लगा दे.. 
बस इस दिल को दर्द से ऐसा भर दे..

की ... " नीशी " 
पुरे आलम में ये दरद दर्द की दवा ना मिले,

या ... 
फिर दीवाना कर के ये दुनिया के हवाले कर दे !

या !
 बिखेर दे.! 

नलिनी सिंह " नीशी " —

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