Thursday, 30 August 2012

अरे, ऐसे कैसे सताना, जताना, छेडना छोड़ दे ?

अरे, 

ऐसे कैसे सताना, जताना, छेडना छोड़ दे ? 

जो बदनाम हो गए है हम, 


हमने बेइंतिहा महोब्बत की है, 

आंसू ओ से जखम धोये है, 





एक ही तो दील है, और इश्क की थकान है , 

जो दर्द ऐ घायल दिल पर इश्क का राज है. 


सुकूने ऐ दिल नहीं, इश्क पर बेसब्र नज़र है 

तुमको पाकर भी न कम हो सकी दिल की बेताबीया . 

                                  नलिनी सिंह ".नीशी "

No comments:

Post a Comment