जिन्दगी एक जी बहलाने वाला खिलौना है, छलावा है,गम का दरिया है,,
जिन्दगी एक ख्याल है, एक जुल्मी ख्वाब है, आसुओ का जाम है,
ये जिन्दगी क्या है ?
अधूरे अरमान, ख़वाहिशो को मिटा के,
कैसे जिया जाये ये सिखाती है
मुह से कुछ न कहना है, पर चुपके से
आहे भर के कैसे जीना है ये सिखाती है
यहाँ कदम कदम पर सैकड़ों धोखा है,
मर मर के कैसे जिया जाये सिखाती है
फिर भी ना जाने हमे...
ये जिन्दगी से प्यार क्यों है ? तेरी चाहत की आश क्यों है ?
नलिनी सिंह " नीशी "

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