Sunday, 9 September 2012

संसार मे रिश्तें और मोहब्बत



संसार मे रिश्तें और मोहब्बत न होती तो ? 

रिश्तें और मोहब्बत में !
अपने आप को किसी पे लूटाने की चाहत न होती 

अपेक्षाएं,शिकायतें, तकरारे, दूरीयाँ, यादें, मायूसी,

तड़प, दर्द, मजबूरिया, जीने मरने की कसमे न होती, 






और ! " नीशी "हमारी ये शायरी इतनी खूबसूरत न होती ! 


नलिनी सिंह " नीशी "

1 comment:

  1. कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,
    यूं कोई बेवफा नहीं होता,
    जी करता है सच बोलू,
    क्या करुं हौंसला नहीं होता..

    तू जागीर है किसी और की
    अय जानेगज़ल,
    लोग तूफान उठा देंगे...,
    मेरे साथ ना चल.......।।

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