तू ! आख़री बार खुद की तकदीर
आजमाने की कोशिश न कर,
हम तो मेरे खुदा की खुदाई से भी
बगावत कर के !
अपनी हाँथो की लकीरों में तुज पे
अपना हक्क लिखा के आये है,
अपनी किस्मत की लिखावट में
तुजे दुआ ओ में लिखा के आये है.
अपने दामन के हर तार में तूजे
हम साया बना के आये है ,
अपनी वक्त ए मोहब्बत में तुजे
मुठ्ठी में साथ लेके आये है.
अपने सुकूने ऐ बेसब्र इश्क पर मेरे
खुदा की रहम नज़र पाए आये है.
नलिनी सिंह " नीशी "

अपने सुकूने ऐ बेसब्र इश्क पर मेरे
ReplyDeleteखुदा की रहम नज़र पाए आये है.
વાહ !
महेश JI...SHUKRIYA JI...
ReplyDeleteहम तो मेरे खुदा की खुदाई से भी
ReplyDeleteबगावत कर के ! ..
अपनी हाँथो की लकीरों में तुज पे
अपना हक्क लिखा के आये है,
वाह बोहॊत ख़ूब
इश्क़ आंधी हॆ तूफ़ान हॆ सुनामी हॆ
इस के सामने कॊन सी ताक़त ठेर सकती हॆ
बोहॊत आला शाइरी