Friday, 14 September 2012

साकी पीने की,



कोई मौसम नही होती साकी पीने की,
जाके माय खाने में के जान में जान आयी,

अब तो तड़प है ना जीने की,
अब तो तड़प है सिर्फ पीने की,




अब तो तड़प है ! 
हर जाम में तेरी दिलकशी तस्वीर पानेकी.


नलिनी सिंह " नीशी "

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