ये मिटटी के पुतले बेवफा है |
ये जिस्म और खूबसूरती बेवफा है||
इससे प्यार मत करो ! ये हमे वफ़ा नही देते |
प्यार करो ! वफ़ा करो तो ! इससे करो ||
ये खुदा, ये आत्मा के "रिश्तों" से, ये आसमाँ |
ये ज़मीं, ये फ़िज़ाऐ ,ये नज़ारो से करो ||
" नीशी " जिसमे वफ़ा ही वफ़ा पाओगे |
ये मिटटी के पुतले हमे वफ़ा नही देते ||
नलिनी सिंह " नीशी "

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