Friday, 7 September 2012

! ऐ ज़िन्दगी !




! ऐ ज़िन्दगी !

कैसे न कहे तुमको खुदा, 
जो तेरे सजदे में सर झुका जाता है.

कैसे न करे तुमसे वफ़ा,
जो तेरे कदमो में दिल रुक जाता है. 





कुछ तो बात है तुज में, 
जो तेरा दिल पे नशा छाये जाता है. 

जिन्दगी ! एक जी बहलाने वाला खिलौना है. 

                                           नलिनी सिंह " नीशी "

2 comments:

  1. ab kya batae tumhe tumhare pyar ka nasha hi asa he jo hame behka jata hai baki kambat sharab to bas ak bahana he tere paas aaneka......jn

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  2. तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज़ की कमी है
    किसी और चीज़ की अब, दरकार ही नहीं है
    तेरे साथ से ग़ुलाम अब, गुलफाम हो रहा है

    मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा प्यार कैसे पाऊँ
    टूटी हुई वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं
    तेरी प्रेरणा से ही, सब तमाम हो रहा है
    तेरी प्रेरणा से ही यह कमाल हो रहा है...

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