नलिनीसिंह "नीशी" की रचनाए आप तक
Sunday, 9 September 2012
सनम !
सनम !
इतनी उछलती,मचलती, तेज न चला करो,
कही हमारी उनफ़ती साँसे बैठ ना जाए,
कही हमारी बेजान जान निकल ना जाए
अब हमारे दिल को मचल जाने दो,
अब हमे होश में न आने दो,
" नीशी "
अब हमे होश में न आने दो,
नलिनी सिंह " नीशी "
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