तुम क्या हो ! ये तुम्हें मालूम नहीं है शायद,
मुझे ये आज बताने की इजाजत दे दो ||
तेरी यादें मेरी जिंदगी का एक हसीन लम्हा हैं,
" नीशी " तेरी यादें जश्न है मेरी ज़िन्दगी का ||
सिमट न पाए अल्फाजो में ये यादों के तराने !
जो कलेजे से लगा के रखा हैं ||
नलिनी सिंह " नीशी "
No comments:
Post a Comment