Friday, 7 September 2012

! ! ! ऐ परभू ! ! !



ऐ परभू ! ! !

तू ही यहाँ स्वर्ग है, तू ही यहाँ नरक है , 


खुदा गवाह है की...

जनम भी यहाँ है, मृत्युं भी यहाँ है,
धरम भी यहाँ है , परम भी यहाँ है , भरम भी यहाँ है, 
अमावस भी यहाँ है , पूनम भी यहाँ है ,

और इंसान के करम के फैंसले भी यहाँ पे हो जाते है ! 




ऐ कमजोर इंसान ! 
करम की गती न्यारी जो टाली न टलें, 
करम काल चक्र तुजे न छोड़े,

बस ! ! 
तू ये नेकी करम की रसम अदा करके जिन्दगी जिए जा. 

नलिनी सिंह " नीशी " .

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