ऐ परभू ! ! !
तू ही यहाँ स्वर्ग है, तू ही यहाँ नरक है ,
खुदा गवाह है की...
जनम भी यहाँ है, मृत्युं भी यहाँ है,
धरम भी यहाँ है , परम भी यहाँ है , भरम भी यहाँ है,
अमावस भी यहाँ है , पूनम भी यहाँ है ,
और इंसान के करम के फैंसले भी यहाँ पे हो जाते है !
ऐ कमजोर इंसान !
करम की गती न्यारी जो टाली न टलें,
करम काल चक्र तुजे न छोड़े,
बस ! !
तू ये नेकी करम की रसम अदा करके जिन्दगी जिए जा.
नलिनी सिंह " नीशी " .

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