Monday, 3 September 2012

मन ही मन जले


मन ही मन जले है उजाले जीवनपथ में, 

दर्पण दीप ह्रदय की हर कोने में.





जिसे मैंने पूजा इन उठते तूफ़ानों को, 

मत अंदर ही अंदर रह जाने दे.


लेकिन ये ज़िन्दगी तो कोई ज़िन्दगी नहीं, 

" नीशी ".क्यों इसके फ़ैसले हमें मंज़ूर हो गए. 


नलिनी सिंह " नीशी ".

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