Wednesday, 12 September 2012

कोई वादा नही किया



कोई वादा नही किया फिर भी क्यों बेचैनी छाई हैं |

कोई इंतज़ार नही किया फिर भी क्यों उमीदें छाई हैं ||






मेरे साथ फ़िज़ाओं में चाँद भी है रुसवायी हैं | 

सितारों की इस भीड़ में चांदनी भी तनहा हैं || 



नलिनी सिंह " नीशी "

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